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मध्य प्रदेश भूमि स्वामित्व महाअभियान: MP में किसानों की जमीन की मुफ्त रजिस्ट्री , जानिए पूरी प्रक्रिया

मध्य प्रदेश भूमि स्वामित्व योजना:

मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में गाँव-गाँव में इस समय एक ही चर्चा सबसे ज्यादा चल रही है- किसानों को उनकी जमीन और मकान का असली मालिकाना हक मिलना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब उन लाखों परिवारों को जमीन की पक्की रजिस्ट्री को बिल्कुल मुफ्त में सरकार खुद ही पट्टे मालिक को पट्टे  सौंप रही है।

भूमि स्वामित्व योजना

लेकिन यह पूरी योजना क्या है, इससे किसान को क्या फायदा होगा आइए इसे बहुत ही आसान शब्दो में समझते हैं।

यह योजना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 17 सितंबर 2026 से पूरे मध्य प्रदेश में एक महाअभियान के रूप में शुरू की जा चुकी है।

इस योजना को पूरे एक महीने तक चलाया जाएगा, जिसके तहत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर (कैंप) आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में राजस्व विभाग के अधिकारी और पटवारी मौजूद रहकर जो पात्र ग्रामीणों और किसानों के पट्टों को पक्की रजिस्ट्री में बदलने की प्रक्रिया को स्वयं मौके पर मौजूद रहकर , निशुल्क पूरा करेंगे।

 

1.भूमिस्वामित्व योजना

अगर आप गांव के रहने वाले हैं, तो आप जानते होंगे कि शहरों की तरह गांवों में मकानों या आबादी की जमीन के पक्के कागज (जैसे रजिस्ट्री) बहुत कम लोगों के पास होते हैं। ज्यादातर लोग पुरखों की जमीन पर रह रहे हैं या फिर सरकार की तरफ से उन्हें ‘पट्टा’ मिला हुआ है।

पट्टा होना अच्छी बात है लेकिन कानूनी रूप से इसकी कई सीमाएं होती हैं। आप पट्टे की जमीन पर न तो आसानी से बैंक से बड़ा लोन ले पाते हैं, और न ही उसे आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं।

 

डॉ. मोहन यादव सरकार राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस महाअभियान के तहत मध्य प्रदेश के लगभग 50 हजार से अधिक गांवों की संपत्तियों को डिजिटल मैप से जोड़ने की तैयारी मैं है, सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण संपत्ति को एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी प्रदान करना है, जिससे भविष्य में होने वाले जमीन संबंधी मुकदमों और फर्जीवाड़े को पूरी तरह से रोका जा सके।

2.खर्च ₹1 भी नहीं लगेगा

जब भी किसी सरकारी काम की बात आती है, तो आम आदमी यही सोचता है कि स्टाम्प, नोटरी और कोर्ट के चक्कर में हजारों रुपये खर्च हो जाएंगे। लेकिन इस योजना की सबसे बड़ी खास बात यही है कि सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी, Cess और पंजीयन शुल्क (Registration Fee) को पूरी तरह से माफ कर दिया है।

बचत :अगर आप खुद एक आम रजिस्ट्री कराने जाएं, तो जमीन की कीमत का लगभग 5% से 10% तक का खर्च सरकारी फीस में चला जाता है।

सरकार उठाएगी खर्च : मध्य प्रदेश के करीब 48 लाख परिवारों की रजिस्ट्री का यह पूरा खर्च सरकार खुद वहन कर रही है। सरकार करीब ₹3,800 करोड़ रुपये का खर्च खुद मध्य प्रदेश सरकार उठा रही है। किसानों की जेब से रजिस्ट्री के नाम पर एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा।

3. पक्की रजिस्ट्री होने से किसान को क्या फायदा मिलेगा

कई लोगों के मन में यह सवाल है कि जब हमारे पास पहले से पट्टा है, तो हम रजिस्ट्री के चक्कर में क्यों पड़ें रजिस्ट्री होने के तीन सबसे बड़े फायदे हैं:

बैंक लोन आसानी से मिलेगा:

पट्टे की जमीन पर बैंक लोन देने से कतराते हैं। लेकिन जैसे ही आपके हाथ में पक्की रजिस्ट्री आती है, आप उस पर आसानी से खेती, ट्रैक्टर या फिर व्यवसाय के लिए बैंक लोन आसानी से ले पाएंगे।

विवादों से हमेशा के लिए मुक्ति:

पक्की रजिस्ट्री होने के बाद जमीन सरकारी रिकॉर्ड में खुद का नाम पक्का हो जाती है। इससे भाइयों या पड़ोसियों के बीच होने वाले जमीन के झगड़े हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे।

जमीन की सही कीमत तय कर पएंगे :

रजिस्ट्री होने के बाद आपकी संपत्ति की बाजार में कानूनी कीमत (Market Value) बढ़ जाती है। आप अपनी संपत्ति के असली और कानूनी मालिक बन जाते हैं। इससे आप अपनी जमीन की अपनी मर्जी से सही कीमत तय कर पएंगे।

4. वनाधिकार पट्टों का क्या मामला है?

इस योजना का एक और बहुत बड़ा पहलू आदिवासी और परंपरागत वन निवासी भाइयों से जुड़ा है। जिन परिवारों को पहले वनाधिकार पट्टा (Forest Rights Act)मिला हुआ था, उन्हें भी अब इस मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

 5. यह काम कैसे होगा और आपको क्या करना है?

सरकार इसके लिए जिला मुख्यालयों के बजाय आपके गांव या ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर (Camps)लगा रही है। आपको बड़े शहरों के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। शिविर में ही राजस्व विभाग के अधिकारी और पटवारी पहुंच रहे हैं, जहां दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करके आपको रजिस्ट्री के कागज सौंपे जाएंगे।

योजना के लिए कौन है पात्रता  (Eligibility Criteria)

  1. ग्रामीण निवासी: आवेदक को उस गांव का मूल निवासी होना चाहिए , जहां यह सर्वे और अभियान चलाया जा रहा है।
  2. आबादी भूमि पर कब्जा: आवेदक ग्रामीण क्षेत्रों में रहवासी हो, भूमि या सरकारी पट्टे की जमीन  पर स्यम का कब्जा होना चाहिए
  3. समयावधि नियम: ऐसे लोग जो 25 सितंबर 2018 या उससे पहले से गांव की आबादी भूमि पर रह रहे हैं, वे इस योजना के पूर्ण पात्र हैं। 
  4. सत्यापन में भागीदारी: जमीन के  ड्रोन सर्वे और नक्शा प्रदर्शन के दौरान आवेदक के  द्वारा अपनी भूमि का सत्यापन कराया गया हो।

आवश्यक दस्तावेज़ (Required Documents )

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card): पहचान की पुष्टि और e-KYC के लिए आवश्यक है ।
  • समग्र आईडी (Samagra ID): मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दी गई परिवार या सदस्य आईडी।
  • मोबाइल नंबर: जो आधार कार्ड से लिंक हो, ताकि सत्यापन के समय OTP आ सके।
  • कब्जे या पट्टे का प्रमाण: यदि पहले से आप के पास  कोई पुराना सरकारी पट्टा, टैक्स रसीद या ग्राम पंचायत का कोई पुराना भूमि रिकॉर्ड मौजूद हो।
  • पासपोर्ट साइज फोटो

आवेदन की प्रक्रिया:

  1. e-KYC और सत्यापन: सबसे पहले अपने आबादी प्लॉट का e-KYC या आवश्यक सत्यापन एमपी भूलेख  पोर्टल के माध्यम से करवाएं।
  2. आवेदन दर्ज करना: आप अपने क्षेत्र के पटवारी से संपर्क कर सकते हैं या फिर MP e-Seva App के माध्यम से खुद भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
  3. पटवारी जांच:  इसके बाद आपके द्वारा दिए गए दस्तावेजों और मौके पर जमीन के कब्जे का भौतिक सत्यापन पटवारी द्वारा किया जाएगा।
  4. अंतिम रजिस्ट्री: जांच पूरी होने के बाद आखिरी चरण में संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार द्वारा मुफ्त रजिस्ट्री  की कार्रवाई पूरी कर दी जाएगी।

मुख रूप से इन दो बातो का ध्यान रखें

1. अफवाहों से बचें: सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को 100% मुफ्त घोषित किया है। अगर कोई आपसे ‘सुविधा शुल्क’ या दलाली मांगता है, तो उसकी शिकायत तुरंत बड़े अधिकारियों से करें।

2. इंटरनेट/सर्वर की समस्या: गांवों में कभी-कभी सर्वर डाउन होने से काम में देरी हो सकती है, इसलिए थोड़ा धैर्य रखें और अपने पंचायत में लगने वाले कैंप की तारीख का पता लगाकर पटवारी से संपर्क बनाए रखें।

 निष्कर्ष:

यह मध्य प्रदेश के ग्रामीण इतिहास का एक बेहद क्रांतिकारी कदम है। सालों से जो किसान अपनी ही जमीन पर पक्के कागजों के बिना रह रहा था, उसे अब अपनी जमीन का पक्का और असली मालिकाना हक मिल रहा है। अगर आपके पास भी स्वामित्व योजना का कार्ड है, तो सरकार के इस महाअभियान का हिस्सा बनकर अपने हक की रजिस्ट्री जरूर करवाएं।

क्या आपके गांव में इस योजना के कैंप लगना शुरू हो गए हैं,आपको इस फैसले से क्या फायदा दिख रहा है, कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।  धन्यवाद…

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